नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर मंतर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हो छात्र के बीच इस्तीफा दिया है।

छात्र संगठन CJP की यह प्रमुख मांग थी। NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्र संगठन आंदोलन कर रहे थे। पिछले कई दिनों से जंतर मंतर पर हजारों छात्र आन्दोलन कर रहे थे। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर थे। देश में एक बड़ा आन्दोलन चलने वाली थे।
धर्मेंद्र प्रधान ने X पर युवाओं को संबोधित अपने पत्र में छात्रों की मांग का उल्लेख करते हुए यह पत्र लिखा है। लगभग एक महीने से यह आंदोलन चल रहा है।CJP के प्रतिनिधिमंडल को कल ही केंद्र सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया था। उनकी मांगों में सबसे प्रमुख मांग यही थी। इसके अलावा आंदोलन कर छात्रों पर FIR रद्द करने और सूइसाइड किए छात्रों के परिजनो को 1-1 करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग शामिल है।
इस आंदोलन को लेकर केंद्र की मोदी सरकार निशाने पर थी। विपक्ष खासकर कांग्रेस भी इस आंदोलन में कूद पड़ी थी।
NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और उसे लेकर देशभर में जारी छात्र विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे अपने त्यागपत्र में कहा कि उनका यह निर्णय छात्रों के हित, देश की एकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है। प्रधान ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों का कोई राष्ट्रविरोधी तत्व फायदा न उठा सके और देश का युवा किसी कानूनी विवाद में उलझने के बजाय अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करे, यही उनके इस्तीफे का प्रमुख उद्देश्य है। अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वे हमेशा युवाओं की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में जिस तरह की परिस्थितियां बनीं, उससे वे काफी व्यथित थे। उनका कहना है कि देश की युवाशक्ति को भ्रम और भटकाव से बचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपील की कि छात्र किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे में आने के बजाय अपने लक्ष्य और शिक्षा पर ध्यान दें।इस्तीफे के साथ उन्होंने NEET-UG परीक्षा से जुड़े पूरे घटनाक्रम का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी सामने आते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। इसके बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने अगले वर्ष से परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का भी फैसला किया है। उन्होंने कहा कि 21 जून को 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए पुनः परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई और 16 जुलाई को घोषित परिणामों में बड़ी संख्या में मेधावी छात्रों ने सफलता हासिल की। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में यह भी कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की थी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और आंदोलन को गलत दिशा देने की कोशिश की, जिससे स्थिति और जटिल हो गई। अपने संदेश के अंत में पूर्व शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का धन्यवाद देते हुए कहा कि पद छोड़ने के बाद भी राष्ट्रसेवा, शिक्षा सुधार और युवाओं के हितों के लिए उनका समर्पण पहले की तरह जारी रहेगा।

