नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे *आसाराम बापू* को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए दाखिल की गई अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि मौजूदा मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उन्हें अभी जेल से बाहर भेजने का कोई आधार नहीं बनता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) की रिपोर्ट के आधार पर लिया है। अदालत ने आसाराम की याचिका को लंबित रखते हुए कहा कि अगर भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति ज्यादा खराब होती है तो वह दोबारा अंतरिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान AIIMS की ओर से अदालत को बताया गया कि फिलहाल आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, डॉक्टरों ने उनकी लगातार स्वास्थ्य निगरानी की सलाह दी है और कहा है कि उन पर 24 घंटे मेडिकल ऑब्जर्वेशन रखा जाना चाहिए।
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम की स्थिति ऐसी नहीं है कि उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती करना जरूरी हो। डॉक्टरों ने उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखने की बात कही है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में अपनी दलील रखी। उन्होंने कहा कि आसाराम ने हाईकोर्ट से 20 दिन की पैरोल मांगी थी और सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग करते समय इस जानकारी का पूरी तरह उल्लेख नहीं किया गया।
तुषार मेहता ने यह भी बताया कि आसाराम को हाईकोर्ट से पहले ही 20 दिन की पैरोल मिल चुकी है। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका को खत्म नहीं किया है, बल्कि उसे लंबित रखा है। इसका मतलब है कि अगर उनकी स्वास्थ्य स्थिति में गंभीर बदलाव आता है तो वह फिर से अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
गौरतलब है कि आसाराम बापू नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। लंबे समय से वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए राहत की मांग करते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल उन्हें जेल में ही रहना होगा।

