न्यूज डेस्क: यह महत्वपूर्ण समाचार है। इसको लेकर झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वैसे तो हर दिन कुछ ना कुछ होता ही है। जामताड़ा की घटना को लेकर भाजपा की एक जांच टीम बनी जिसने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। सच जानने का प्रयास किया।
पिछले दिनों जामताड़ा सदर अस्पताल में प्रसव के लिए लाई गई गर्भवती महिला रीना देवी और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही और एम्बुलेंस न मिलने का आरोप लगाया। परिजनों का आरोप है कि महिला को सुबह अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी और उसे रेफर कर दिया गया। रेफर करने के बावजूद समय पर एम्बुलेंस नहीं मिली।
भाजपा को मौका मिला। स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी के क्षेत्र का भी मामला है।घटना की गंभीरता को देखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू ने प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी, पूर्व सांसद सुनील सोरेन एवं प्रदेश मंत्री कृष्णा महतो की एक जांच कमेटी गठन की, जो आज पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना की पूर्ण जानकारी ली। जानकारी के बाद विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा जाएगा।
पीड़ित परिवार से मिलने के बाद जामताड़ा में प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था अब ऐसी हो गई है कि सरकारी अस्पताल में मरीज दो पैरों पर आते हैं और चार कंधों पर अपने घर जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन पूरा देश भगवान जगन्नाथ की आराधना में व्यस्त था उसी दिन सुबह के 6 बजे जामताड़ा के महोलडांगा निवासी कृष्णा कुमार की पत्नी रीना देवी को उनके परिजन प्रसव पीड़ा के बाद सदर अस्पताल में भर्ती करवाया। अस्पताल में भर्ती करवाने के थोड़ी देर बाद ही रीना देवी की तबीयत बिगड़ने लगी, जिस पर उस समय उपस्थित वहां के डॉक्टर और स्टाफ ने परिजनों से 9000 एवं ₹5000 की मांग कर उन्हें दूसरे अस्पताल में रेफर करने की बात कही। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण 11 बजे रीना देवी की मृत्यु हो गई। यह घटना पूरी तरह से सरकारी अस्पताल की विफलताओं को दर्शाता है। जबकि जामताड़ा के विधायक खुद स्वास्थ्य विभाग के मंत्री हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। झारखंड के अलग-अलग जिलों में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर होती रही है। चाईबासा में स्वास्थ्य विभाग की गलती के कारण थैलेसीमिया पीड़ितों को एचआईवी वाला रक्त चढ़ा दिया जाता है तो कहीं एंबुलेंस नहीं मिलने से छोटी सी बच्ची की जान उसके मां के गोद में हो जाता है। वहीं गर्भवती महिला की मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब रीना देवी के परिजन न्याय की गुहार लगाते हैं तो अस्पताल पर ताला लगा दिया जाता है और जब परिजन प्रतिकार कर सड़क पर उतरते हैं तो उनसे बात करने कोई भी पदाधिकारी या सरकार के जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचते। बल्कि वहां पर स्वास्थ्य मंत्री के निजी सहायक अजहर अंसारी और कांग्रेस नेता ईसामुल हसन मामले को दबाने के लिए पहुंचते है। उनके इशारे पर ही सदर अस्पताल में तोड़फोड़ होती है। पुलिस प्रशासन का दबाब बना कर मामले को दबाने का प्रयास करते है। वहीं जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता इस पूरे मामले पर न्याय की गुहार लगाने पहुंचते हैं तो पुलिस प्रशासन दबाव के कारण भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सहित आठ लोगों पर झूठा केस जो नॉन बेलेबल है लगा देते हैं।
प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बावरी ने बताया यह झूठा केस भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लगाने का कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले चतरा में जहां प्रदेश अध्यक्ष गए थे वहां पर भी दो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर झूठा केस किया गया है। जमशेदपुर में जब पीड़ित परिवार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी सड़क पर उतरती है तो पुलिस के द्वारा भाजपा के 15 लोगों पर झूठा केस डाल दिया जाता है। उन्होंने साफ कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता जेल जाने से नहीं डरते हैं। सरकार कितना भी दबाव बना ले भाजपा न्याय की लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ रहेगी।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और सरकार से मांग किया कि इस पूरे प्रकरण में सरकार पीड़ित परिवार को मुआवजा दे और घटना में संलिप्त आरोपियों पर हत्या की धारा लगाई जाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री से भी उन्होंने कहा कि उनसे झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधर नहीं रही है इसलिए वे भी अपना इस्तीफा झारखंड के हित में दे।
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