न्यूज डेस्क : लोकसभा में कल यानी सोमवार को एंटी पेपर लीक विधेयक पेश की गई।इस विधेयक में कड़े प्रावधान किए गए हैं। पेपर लीक मामले में दोषियों को 10 साल तक की सज़ा। यानी सलाखों के पीछे रहेंगे। इसके अलावा 10 करोड़ रुपए जुर्माना भी लगेगा।
इस विधेयक में पेपर लीक मामले को लेकर कड़े कानून की जरूरत महसूस की जा रही है। जिस प्रकार से NEET UG परीक्षा का पेपर लीक हुआ और उसको लेकर स्टूडेंट्स का बड़ा आन्दोलन हो गया। केंद्र सरकार की भारी आलोचना होने लगी। इस्तीफा की संस्कृति में विश्वास नहीं करने वाली मोदी सरकार को CJP की मांग माननी पड़ी।
PM मोदी ने छात्रों से कड़े कानून के संबंध वीडियो के माध्यम से संवाद भी किया था। आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। वो भी हो गया। संसद के मॉनसून सत्र में यह बिल लाया गया है। इस विधेयक में 10 साल तक कारावास की सज़ा और 10 करोड़ रुपए जुर्माना का प्रावधान है। सरकार की अपेक्षा है कि एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर पूरी चर्चा हो और सर्वसम्मति से पारित किया जाए।
इसी संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा शुरू हुई। मंत्री जितेन्द्र सिंह ने चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का मामला सिर्फ केंद्र से जुड़ा नहीं है। यह मामला राज्यों से भी जुड़ा है। इसलिए सभी को मिलकर यानी केंद्र और राज्य सरकार को इस समस्या के समाधान के लिए काम करने की जरूरत है। विपक्ष की पूरी सहभागिता जरूरी है।
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