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हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा, लता मंगेशकर जी को जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि।

Rajesh Kumar

Rajesh Kumar

Sep 28, 2026 · 8:59 AM
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हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा, लता मंगेशकर जी को जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि।
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न्यूज डेस्क: संसार में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इतिहास के पन्नों में अपने नाम इस तरह अंकित करते हैं कि दुनिया याद रखती है। पीढ़ियाँ याद रखती हैं। कोई उन्हें विस्मृत नहीं कर सकता है। चाहे जनरेशन कोई हो, सब के लिए वे महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इनमें से एक नाम लता मंगेशकर जी का है। वो परम आदरणीय रही हैं। अपने गीत से उन्होंने भारत माता के स्वर को सरगम दिया। आज उनकी जयंती है। आज वो सशरीर संसार में नहीं हैं पर हवाओं में उनकी आवाज़ गूंजती है।

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर, 1929 को इंदौर में हुआ था और उन्होंने 13 वर्ष की उम्र में पार्श्वगायन की शुरुआत की थी। उन्हें भारत रत्न, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण और पद्म विभूषण समेत अनेक सम्मान मिले।

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर: जिसकी आवाज आज भी दिलों में गूंजती है।

संगीत के माहौल में गुजरा बचपन:-

लता मंगेशकर के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और रंगमंच कलाकार थे। संगीत की शुरुआती शिक्षा उन्हें अपने पिता से ही मिली। महज छोटी उम्र में उन्होंने मंच पर अभिनय और गायन शुरू कर दिया था।

साल 1942 में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी भी लता मंगेशकर के कंधों पर आ गई। इसी दौर में उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे पार्श्वगायन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। उत्तरोत्तर उनकी पहचान बढ़ती चली गई

लता मंगेशकर ने 13 साल की उम्र में पहला गीत गाया

लता मंगेशकर ने 13 वर्ष की उम्र में मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। वर्ष 1946 में फिल्म ‘आप की सेवा में’ के लिए उन्होंने हिंदी फिल्म में पार्श्वगायन किया।

साल 1949 में फिल्म ‘महल’ का गीत ‘आएगा आने वाला’ उनकी लोकप्रियता में एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ। इसके बाद उनकी आवाज हिंदी सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों की पहचान का हिस्सा बनती चली गई।

हजारों गीतों का ख़ज़ाना :-

लता मंगेशकर ने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली और कई अन्य भारतीय भाषाओं में गीत गाए। उनके गीतों में प्रेम, विरह, भक्ति, देशभक्ति और जीवन के अलग-अलग रंग सुनाई देते हैं।‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, ‘लग जा गले’, ‘अजीब दास्तां है ये’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’ जैसे उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

लता मंगेशकर को देश के सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया गया:-

लता मंगेशकर को वर्ष 1969 में पद्म भूषण, 1989 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, 1999 में पद्म विभूषण और 2001 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समेत कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए।उनकी उपलब्धियां केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं थीं। भारतीय फिल्म संगीत पर उनका प्रभाव इतना व्यापक रहा कि कई दशकों तक उनकी आवाज सिनेमा का अभिन्न हिस्सा बनी रही।

निधन: आवाज थमी, लेकिन गीत अमर हो गए

लता मंगेशकर का निधन 6 फरवरी,2022 को मुंबई में 92 वर्ष की उम्र में हुआ। उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।उनकी आवाज भले ही हमेशा के लिए खामोश हो गई, लेकिन उनके गीत आज भी करोड़ों लोगों की यादों का हिस्सा हैं। लता मंगेशकर की संगीत यात्रा भारतीय सिनेमा और संगीत के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद करती रहेंगी। हमारी तरफ से सरस्वती पुत्री लता मंगेशकर जी को स्वरबद्ध नमन।

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