न्यूज डेस्क : पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक नया प्रावधान वाला विधेयक आया है। यह संशोधन विधेयक है। हम जानते हैं कि देश में पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक का मामला गरमाया हुआ है। नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक होने से देश में एक तरह से उबाल आ गया था। आज भी परीक्षा को लेकर झारखंड में आंदोलन चल रहा है। यहां JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर आंदोलन चल रहा है।
इसको लेकर दिल्ली में बड़ा आंदोलन भी हो चुका है। CGP जैसी एक नई पार्टी जन्म ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया।कई राज्यों में भी आंदोलन हुए हैं।इधर भारत सरकार ने संसद के मानसून सत्र में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक लाया जिसे पारित कर दिया गया है। इस विधायक के तहत पेपर लीक मामले में दोषियों को कड़ी सजा और बड़ा जुर्माना लगाने का प्रावधान है। पेपर लीक करने वाले के लिए 10 साल की जेल और 10 करोड़ रूपया जुर्माना लगाने का प्रावधान है।केंद्र की मोदी सरकार इस विधेयक को लेकर काफी सजग रही है। वैसे संसद में इस विधेयक पर पक्ष और विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान खूब हंगामा हुआ।विपक्ष ने केंद्र सरकार पर बड़े-बड़े आरोप लगाए।वहीं संसद में सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष को भी कड़ा जवाब देने का प्रयास किया गया।
*PM नरेंद्र मोदी ने नया वीडियो संदेश जारी किया:-
संसद के द्वारा विधेयक पारित होने के बाद देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगभग 11 बजे एक वीडियो संदेश आया जिसमें उन्होंने भारत सरकार के संकल्प को दोहराया है कि पेपर लीक के मामले को गंभीरता से लिया गया है। केंद्र और राज्य मिलकर इस गंभीर समस्या का समाधान करेंगे। उन्होंने कहा है कि पेपर लीक सिर्फ केंद्र की नहीं बल्कि राज्यों की भी समस्या रही है इसलिए सभी को मिलकर काम करना है। पेपर लीक से संबंधित परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए मशहूर टेक्नोलॉजिस्ट नंदन नीलकेनी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके बारे में भी अपने वीडियो में जानकारी दी। लोकसभा में यह 29 जुलाई को पारित हो गया था। राज्यसभा से यह 30 जुलाई को पारित हुआ। विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।
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