न्यूज डेस्क: एशियन गेम्स में भारत माता का मस्तक सोने के मुकुट से आज जगमग कर रहा है। वजह साफ है। जापान के अयाची नागोया में भारत के सपूत और सुपुत्री ने सोना यानी गोल्ड जीत लिया है। इसमें एक रिकॉर्ड भी बना है।10 मीटर पिस्टल शूटिंग मिक्सड में कमलजीत और सुरुचि इंदर सिंह ने गोल्ड मेडल जीता है। यह गर्व की बात है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न ने कमलजीत और सुरुचि इंदर सिंह को बधाई दी है पूरा देश आज उनके ऊपर गर्व कर रहा है एशियन गेम्स में एक रिकॉर्ड भी बना है। शूटिंग में जो अंक इस इवेंट में आए हैं वह एक रिकॉर्ड है। दोनों ने मिक्सड इवेंट में 484.6 अंक पाए हैं।
जानें सुरुचि सिंह को :सुरुचि इंदर सिंह हरियाणा के झज्जर की रहने वाली हैं।28 अप्रैल 2006 को जन्मी सुरुचि ने करीब 13 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की थी। परिवार वाले पहले कुश्ती में इसे देना चाहते थे और दिया भी। एक हादसा हुआ। फिर सुरुचि ने भिवानी की गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग अकादमी में कोच सुरेश सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने खूब मेहनत की।
2025 में अपना जलवा दिखाना शुरू किया: सुरुचि इंदर सिंह ने 2025 में सीनियर इंटरनेशनल सर्किट पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने ब्यूनस आयर्स, लीमा और म्यूनिख में ISSF वर्ल्ड कप में गोल्ड जीते. लीमा में उन्होंने सौरभ चौधरी के साथ मिक्स्ड टीम में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था। सुरुचि ने फिर पीछे नहीं देखा।
वर्ल्ड कप में भी जीता था गोल्ड: पिछले साल 2025 के ISSF वर्ल्ड कप फाइनल में दोहा में सुरुचि ने 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीता था।इस क्रम में उन्होंने 245.1 अंक के साथ जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। साल 2026 में भी उनका प्रदर्शन जारी रहा और नई दिल्ली एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में मिक्स्ड टीम इवेंट में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता।
पहलवान से बनी शूटर : सुरुचि इंदर सिंह पहले पहलवान बनना चाहती थी। एक मैच के दौरान जब वे रेसलिंग कर रही थीं तो उनकी कॉलरबोन (हंसली) में फ्रैक्चर हो गया। इस कारण उन्हें रेसलिंग छोड़नी पड़ी और फिर वे शूटिंग करने लगी। उनके पिता ने उन्हें काफी ज्यादा सपोर्ट किया, जिसके बाद आज वो शूटर बन पाई हैं। आज देश का नाम रोशन की हैं।
कौन हैं कमलजीत, जानिए: इन्होंने देश का गौरव बढ़ाया है।वहीं, 22 अगस्त 2003 को जन्मे कमलजीत रेवाड़ी के सुलखा गांव से हैं। शूटिंग शुरू करने से पहले वह ट्रैक एंड फील्ड एथलेटिक्स में हिस्सा लेते थे।चोट के बाद उन्हें एथलेटिक्स छोड़ना पड़ा और 2019 में उन्होंने शूटिंग को अपना नया खेल बनाया।
आर्थिक संकट ने नहीं रोका रास्ता:कमलजीत का शुरुआती सफर आसान नहीं रहा। कोचिंग, फीस और प्रतियोगिताओं के खर्च की चुनौती उनके सामने थी। एक समय उन्होंने खेल छोड़ने तक के बारे में सोचा, लेकिन माता-पिता के सहयोग से उन्होंने अभ्यास जारी रखा।इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई।
जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी चमके: साल 2023 में कमलजीत ने चांगवॉन में ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल के व्यक्तिगत मुकाबले में गोल्ड जीता।उन्होंने टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक हासिल किया।इसी साल बाकू में वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने टीम इवेंट में ब्रॉन्ज जीता।
CM सैनी ने दी बधाई:हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सुरुचि सिंह और कमलजीत की इस उपलब्धि पर बधाई दी।उन्होंने दोनों खिलाड़ियों की सफलता को हरियाणा और देश के लिए गौरव का विषय बताया। वो झूम रहे हैं।वहीं, केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सुरुचि और कमलजीत को गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई दी।

