भागलपुर : आंगन में बच्चे की किलकारी गूंजे, इसकी ख्वाहिश सभी दंपति को होती है। जिन्हें किन्हीं कारणों से अपना बच्चा नहीं होता, वे गोद लेते हैं। गोद लेने के कड़े कानून हैं। रांची के एक दंपति ने बच्चा गोद लिया है।
दत्तक ग्रहण की समस्त वैधानिक एवं निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत आज जिला पदाधिकारी एवं सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई की मौजूदगी में लगभग 01 वर्ष आयु के एक बालक को रांची के दत्तक ग्राही दंपति महेश बरई एवं पूनम देवी को सौंपा गया। दत्तक ग्राही पिता व्यवसाय करते हैं।
इसके पूर्व दत्तक ग्रहण से संबंधित वाद को जिला पदाधिकारी के समक्ष सुनवाई हेतु प्रस्तुत किया गया। जिला पदाधिकारी द्वारा दत्तक ग्रहण की अनुमति प्रदान किए जाने के निर्णय के उपरांत आज बालक को विधिवत उसके दत्तक ग्राही माता-पिता को सौंपने की कार्रवाई पूर्ण की गई।
दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को जानना जरूरी है:-
दत्तक ग्रहण की समस्त प्रक्रिया ऑनलाइन एवं निर्धारित वैधानिक प्रावधानों के तहत संपन्न होती है। इच्छुक दत्तक ग्राही माता-पिता मिशन वात्सल्य पोर्टल पर पंजीकरण कर दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकते हैं। पंजीकरण के लिए मोबाइल नंबर, पैन कार्ड एवं ई-मेल आईडी की आवश्यकता होती है।
पंजीकरण के उपरांत निकटतम विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान द्वारा दत्तक ग्राही माता-पिता की होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाती है। पोर्टल के माध्यम से दत्तक ग्राही माता-पिता अपनी पात्रता की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
यह स्पष्ट किया गया कि मिशन वात्सल्य पोर्टल एवं निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अतिरिक्त किसी व्यक्ति, अस्पताल अथवा नर्सिंग होम से सीधे बच्चा गोद लेना गैर-कानूनी है। जिला अंतर्गत दत्तक ग्रहण से संबंधित जानकारी एवं आवश्यक प्रक्रिया के लिए विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान अथवा जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क किया जा सकता है।
किसी परित्यक्त बच्चे के प्राप्त होने पर उसे 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने तथा मिशन वात्सल्य पोर्टल पर भी निर्धारित समयावधि में पंजीकरण कराने का प्रावधान है। इसके बाद बच्चे का विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है। कोई दावेदार सामने नहीं आने की स्थिति में बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चे को विधिक रूप से दत्तक ग्रहण हेतु मुक्त करने की कार्रवाई की जाती है।
इसके उपरांत बच्चे की दंपति के साथ ऑनलाइन मैचिंग, एडॉप्शन कमिटी की बैठक तथा विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान की ओर से जिला पदाधिकारी के समक्ष दत्तक ग्रहण वाद प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। जिला पदाधिकारी के निर्णय के उपरांत बच्चे को दत्तक ग्राही माता-पिता को सौंपने की कार्रवाई पूर्ण होती है।
दत्तक ग्रहण के पश्चात भी प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। बच्चे को दत्तक ग्रहण में दिए जाने के बाद दो वर्षों तक निकटतम विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान द्वारा फॉलो-अप किया जाता है, ताकि बच्चे के हित एवं समुचित देखभाल की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
आज बच्चे को दत्तक ग्राही माता-पिता को सौंपे जाने के अवसर पर सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, समन्वयक, विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान सहित अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
भागलपुर से बच्चे को विधिवत गोद लेने के बाद दत्तक ग्राही दंपति के चेहरे पर खुशी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने इस अवसर पर भावुकता एवं प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बच्चे को अपने परिवार का हिस्सा बनाने पर खुशी जाहिर की।
