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चांद के बाद अब भारत सूर्य की ओर बढ़ा, जानिए सूर्य मिशन की लांचिंग कब और कितने बजे होगी?

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Sep 01, 2023 · 6:51 PM
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चांद के बाद अब भारत सूर्य की ओर बढ़ा, जानिए सूर्य मिशन की लांचिंग कब और कितने बजे होगी?
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चांद के बाद भारत अब सूरज की ओर कदम बढ़ाने के लिए तैयार है. चंद्रयान 3 फिलहाल चंद्रमा से जुड़ी सारे राज इकट्ठा करने में लगा हुआ है तो वही दूसरी ओर शनिवार यानी 2 सितम्बर को सूर्य के सीक्रेट्स पता करने आदित्य-L1 को भेजा जाएगा,और इसे श्रीहरिकोटा के लॉन्चिंग सेंटर से आदित्य-L1 मिशन को लॉन्च किया जाएगा. इसरो की ओर से लॉन्चिंग को लेकर तमाम तैयारियां कर ली गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने बताया इसरो सौर मिशन ‘आदित्य-एल1’ के लॉन्च के लिए पूरे तरह से तैयार है.रॉकेट और सैटेलाइट भी रेडी हैं.साथ ही उन्होंने बताया की इसकी लॉन्चिंग के लिए अभ्यास भी पूरा कर लिया है. लॉन्चिंग को लेकर काउंटडाउन भी शुक्रवार सुबह 11.50 बजे शुरू कर दिया गया है.गौरतलब है कि यह भारत का पहला सूर्य मिशन है. इसरो का आदित्य-L1 मिशन कितनी दूरी तय करेगा आखिर इससे क्या होगा है,उसमें कितना समय लगेगा, मिशन का लक्ष्‍य क्‍या है.यह तमाम जानकारियां हम आपको देंगे.

इसरो ने देश के पहले सोलर मिशन को ‘आदित्य-L1’ नाम दिया है और इसकी मदद से सूर्य के बारे में अधिक से अधिक जानकारी जुटाई जाएगी.बता दे कि आदित्य-L1 मिशन का लॉन्‍च 2 सितंबर 2023 की सुबह 11.50 बजे होगा.इसे भी
चंद्रयान-3 की तरह ही श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्‍पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा.आदित्य एल1 सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रणाली के लार्ज्रेंज पॉइंट 1 के चारों ओर एक हेलो कक्षा में रखा जाएगा और यह जगह धरती से करीब 15 से 16 लाख किलोमीटर दूर है.सूर्य और पृथ्वी जैसे दो-पिंड सिस्‍टम के लिए, लार्ज्रेंज बिंदु ऐसे ऑप्टिम पॉइंट्स बन जाते हैं जहां स्पेसक्राफ्ट कम ईंधन की खपत के साथ बने रह सकते हैं.सोलर-अर्थ सिस्‍टम में पांच लार्ज्रेंज पॉइंट्स हैं.लार्ज्रेंज बिंदु L1 वह है जहां आदित्य एल1 जा रहा हैं. चंद्रयान-3 को जिस तरीके से इसरो की ओर से लाइव दिखाया गया था उसी तरीके से आदित्य L1 के लॉन्चिंग का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा.
सूर्य से जुड़ी जानकारियां जुटाने के लिए अंतरिक्ष आधारित भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 को लॉन्च किए जाने की तारीख जैसे-जैसे पास आ रही है, इसे लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ती जा रही है. धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यह मिशन क्या और कैसे अध्ययन करेगा, इस पर नजरें टिकी होंगी.

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