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FSSAI का डाबर पर सख्त एक्शन! ‘100% Pure’ और ‘100% Natural’ दावों वाले कई फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक

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Aug 04, 2026 · 4:49 PM
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FSSAI का डाबर पर सख्त एक्शन! ‘100% Pure’ और ‘100% Natural’ दावों वाले कई फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक
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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने प्रमुख FMCG कंपनी डाबर इंडिया के कई खाद्य उत्पादों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। नियामक ने कंपनी को उन फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है, जिन पर “100% Pure”, “100% Natural”, “100% Organic” या इसी तरह के पूर्ण शुद्धता वाले दावे किए गए थे। FSSAI का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं और मौजूदा खाद्य विज्ञापन नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

जानकारी के अनुसार, कार्रवाई उन उत्पादों पर की गई है जिनमें शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, देसी घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे फूड आइटम शामिल हैं। प्राधिकरण का मानना है कि किसी खाद्य उत्पाद को “100 प्रतिशत” शुद्ध या प्राकृतिक बताने के लिए वैज्ञानिक और नियामकीय आधार होना आवश्यक है। यदि ऐसा प्रमाण उपलब्ध नहीं है, तो इस तरह के दावे ग्राहकों को गुमराह करने की श्रेणी में आ सकते हैं।

FSSAI ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कुछ उत्पादों पर ऑर्गेनिक होने का दावा किया गया, जबकि संबंधित प्रमाणन और लोगो के उपयोग को लेकर भी सवाल सामने आए। नियामक के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) नियम, 2018 के तहत कंपनियों को ऐसे प्रचार से बचना चाहिए जो उपभोक्ताओं में गलत धारणा पैदा करे या किसी उत्पाद की गुणवत्ता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करे।

प्राधिकरण ने बताया कि कंपनी को पहले भी इस संबंध में नोटिस जारी किया गया था और लेबलिंग तथा प्रचार सामग्री में आवश्यक बदलाव करने के लिए कहा गया था। हालांकि, अपेक्षित सुधार नहीं होने के कारण अब बिक्री रोकने का निर्देश जारी किया गया है। साथ ही कंपनी से 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) जमा करने को कहा गया है।

इस पूरे मामले पर डाबर इंडिया ने कहा है कि उसे FSSAI का नोटिस प्राप्त हो चुका है और कंपनी अपनी वेबसाइट तथा संबंधित प्रचार सामग्री की समीक्षा कर रही है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि वह नियामक के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि FSSAI की यह कार्रवाई केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे खाद्य उद्योग के लिए एक स्पष्ट संदेश है। अब खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और पैकेजिंग पर किए जाने वाले दावों की जांच पहले से अधिक सख्ती से होगी। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना तथा भ्रामक मार्केटिंग पर रोक लगाना है।

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