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झारखंड भाजपा की कार्यसमिति बैठक कराना भूल गए अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी

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Jan 09, 2026 · 9:07 AM
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झारखंड भाजपा की कार्यसमिति बैठक कराना भूल गए अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी
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न्यूज डेस्क : झारखंड भाजपा के अच्छे आने की कामना पार्टी के कार्यकर्ता और शुभचिंतक कर रहे हैं। रघुबर सरकार जाने के बाद से भाजपा 2019 से विपक्ष में है। काम करने के बाद भी रघुबर सरकार रिपीट नहीं कर पाई। उस समय सरकार में हावी कुछ स्वार्थी भाजपा नेता रघुबर दास को बरगलाते रहे। सरकार के कतिपय निर्णय और गलत रणनीति ने रघुबर सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। भाजपा का रथ 25 सीट पर आकर रुक गया। आदिवासी समाज भाजपा से विदक गया।

राज्य में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बन गई। JMM, कांग्रेस और राजद एक साथ आए तो आज भी सत्ता में हैं। हेमंत सोरेन ने जनता की नब्ज़ पकड़ ली लेकिन बीजेपी से अपने ही छूटते चले गए। साल 2024 का विधानसभा चुनाव रहा सहा कसर पूरा कर दिया। बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में पार्टी चुनाव लड़ी और खराब प्रदर्शन हो गया। बाहर से आए नेताओं ने चुनाव को हाईजैक कर लिया। झारखंड में भाजपा असल मुद्दे से भटक गई। परिणाम निराशाजनक आया। बीजेपी 21 पर लटक गई।

भाजपा के झारखंड के नेता और कार्यकर्ताओं की पसंदगी और नपसंदगी सब किनारे लग गई। भाजपा धीरे धीरे स्थिर होती चली गई। खैर पार्टी में अब भी बहुतेरे नेता और कार्यकर्ता हैं, जो निष्ठावान हैं। पार्टी आगे बढ़ेगी। पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू बनाए गए हैं। बड़ी जिम्मेदारी मिली है। कहा जा रहा है कि अन्य की तरह आदित्य साहू ही पूर्णकालिक अध्यक्ष बनेंगे। खरमास खत्म होने का इंतजार है।

खैर मूल मुद्दे पर आते हैं। प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति बैठक काफी समय से नहीं हुई है। जबकि पार्टी का संविधान बताता है कि एक साल में चार कार्यसमिति बैठकें होनी चाहिए। बैठक आहूत करने का काम प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को करना था। लेकिन काफी समय से नहीं हुआ है। इस मुद्दे पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि साल में चार कार्यसमिति बैठकें होनी चाहिए। यह पार्टी का संविधान कहता है। बैठक क्यों नहीं हुई या हो रही है, इस पर बाबूलाल मरांडी से पूछना चाहिए।

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में महत्वपूर्ण विषय आते हैं। राजनीतिक प्रस्ताव आते हैं, समसामयिक विषय पर चर्चा होती है। केंद्रीय नेता का मार्गदर्शन मिलता है। पार्टी के नेताओं का मिलना जुलना होता है। एक जश्न सा माहौल होता है। सब बीते दिनों की बात हो गई है।

इस मुद्दे पर PostNxt ने प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के करीबी प्रदेश मंत्री सरोज सिंह ने कहा कि आज वर्चुअल मीटिंग की संस्कृति आ गई है। मोबाईल पर मीटिंग हो जा रही है। इसलिए कार्यक्रम पर चर्चा और आगामी रणनीति पर विचार विमर्श ऑनलाइन हो जाता है। कोई काम नहीं रुकता है। यानी फिजिकल मीटिंग नहीं हुई तो क्या, काम चल रहा है। जबकि दोनों में फर्क है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को मानो भुला दिया गया। इन सब से नेता कार्यकर्ता ऊर्जा पाते हैं।

 

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