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लव जिहाद के खेल को रोकना सरकार का बड़ा दायित्व

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May 03, 2025 · 10:15 PM
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लव जिहाद के खेल को रोकना सरकार का बड़ा दायित्व
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*झारखंड में लव जिहाद की समस्या कैंसर की तरह बढ़ती जा रही, समाधान निकालना सरकार का दायित्व*

डेस्क : झारखंड में एक बड़ी समस्या कैंसर की तरह बढ़ती जा रही है किस प्रकार से कैंसर अगर फोर्थ स्टेज में आ जाए तो फिर मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है। यह समस्या है लव जिहाद की। हर साल दर्जनों लड़कियां कथित रूप से किसी ने किसी छलावा में आकर फंस जाती हैं और फिर उनका सब कुछ खत्म होने जैसा हो जाता है। लव जिहाद यानी किसी न किसी तरह का दबाव चाहे वह गरीबी की वजह से हो या फिर अन्य चीजों के कारण , लोग भोली भाली लड़कियां गलत लड़के (दूसरे धर्म) से फंस जाती हैं और उनका शोषण होने लगता है। असामाजिक तौर पर इस गली में जो एक बार घुस गया फिर इससे बाहर निकलने का रास्ता ना के बराबर होता है।ऐसे तो झारखंड में कई मामले सामने आए हैं। संथाल परगना के क्षेत्र में लव जिहाद के मामले आते रहे हैं।भोले भाले आदिवासी समाज की लड़कियों को मुस्लिम लड़के के द्वारा फंसाकर शादी का झांसा देकर शोषण करते हैं।कई ऐसे उदाहरण भी मिले हैं जिनमें जमीन हड़पने के लिए आदिवासी लड़की से शादी करते हैं।अब तो यह बीमारी दूसरे क्षेत्र में भी देखने को मिल रही है।

सरायकेला खरसावां के नीमडीह प्रखंड के झिमड़ी में 19 वर्षीय एक लड़की को मोहम्मद तसलीम अंसारी पहले फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया। अपने लोगों को गवाह बनाकर पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में मुस्लिम रीति रिवाज से निबंधित निकाह कर लिया। उसने पहले धर्म परिवर्तन कराया।मोहम्मद तसलीम अंसारी शादीशुदा है।उसके तीन बच्चे पहले से हैं। उसने 19 साल की लड़की को प्रलोभन देकर झांसे में ले लिया और फिर जो उसे करना था वह किया। इस तरह के मामले पर सरकार और इसकी एजेंसी चुप रहती है तो यह एक बड़ा सामाजिक पाप माना जाएगा।पिछले दिनों झिमड़ी गांव में आगजनी की भी घटना हुई। स्थानीय लोग लड़की के अपहरण से काफी गुस्साए हुए थे और आज भी हैं।

इस पर राजनीति भला कैसे रुक सकती थी। परंतु राजनीति अगर नहीं हो तो शायद मामले को ठंडाने में वक्त नहीं लगता है।

इस घटना से सामाजिक विषयों के समझदार या जानकार चिंतित दिख रहे हैं। इस पर सरकार की एजेंसियां स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकती हैं।सामाजिक ताना-बाना को आघात पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। इस बीमारी के इलाज के लिए सरकार गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ या अन्य सामाजिक संगठन का सहयोग ले सकती है। पंचायती राज के प्रतिनिधि भी इस काम में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं महिला जनप्रतिनिधियों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। संस्कृति की रक्षा करना भी सरकार का दायित्व है। कानून के छिद्र से सामाजिक ताने-बाने की तासीर को रिसने देने से रोकना होगा।

इस गांव में और इस परिवार से मिलने के लिए संभवत सत्ता पक्ष का कोई जिम्मेवार शायद नहीं पहुंचा है। गांव के लोग काफी गुस्से में हैं। इधर भाजपा के नेता वहां शनिवार को पहुंचे।प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा विशेष रूप से इस गांव में पार्टी के अन्य नेता और कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे थे।पीड़ित परिवार और अन्य ग्रामीणों से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भाजपा पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड में शासन और प्रशासन का जरा भी खौफ नहीं है। कुछ लोग कानून को ठेंगा दिखाकर उसके साथ खेलने का प्रयास करते हैं। धर्म परिवर्तन का यह खेल सरकार की सुस्ती या फिर आंख मूंद लेने की आदत की वजह से चल रहा है।

बहरहाल, हर सरकार कोई यह सोचना चाहिए कि उनके नागरिक ऐसे किसी चंगुल में ना फंसे।सामाजिक संगठनों का सहयोग लेकर इस लाइलाज बीमारी को ठीक करना जरूरी है। धर्म और संस्कृति की रक्षा बेहद जरूरी है इसे दरकिनार कर हम संस्कारित नहीं हो सकते हैं। और जिस देश या राज्य के नागरिक संस्कारित नहीं होंगे तो उस देश और राज्य का भविष्य कभी उज्जवल नहीं हो सकता है।

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