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रांची रथयात्रा 2026: आज मौसीबाड़ी के लिए निकलेंगे भगवान जगन्नाथ, भक्तों में उत्साह का माहौल

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Jul 16, 2026 · 6:32 PM
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रांची रथयात्रा 2026: आज मौसीबाड़ी के लिए निकलेंगे भगवान जगन्नाथ, भक्तों में उत्साह का माहौल
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रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा 15 दिनों के एकांतवास (अनवसर काल) के बाद एक बार फिर भक्तों के दर्शन के लिए प्रकट हुए। बुधवार को मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ नेत्रोत्सव का आयोजन किया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी के साथ वार्षिक रथयात्रा मेले की भी शुरुआत हो गई, जो 25 जुलाई तक जारी रहेगा।

विशेष पूजा और भव्य आरती का हुआ आयोजन

नेत्रोत्सव से पहले भगवान के विग्रहों का पारंपरिक विधि-विधान से विशेष श्रृंगार किया गया। शाम के समय मंदिर के पट खुलने के बाद 108 दीपों से भव्य मंगल आरती संपन्न हुई। पूजा के दौरान भगवान को इलायची दाना, बादाम और मालपुआ का भोग अर्पित किया गया। दोपहर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लगनी शुरू हो गई थीं और देर रात तक भक्त दर्शन व पूजा-अर्चना करते रहे। मुख्य पुजारी एवं अन्य वैदिक विद्वानों ने पूरे धार्मिक अनुष्ठान को संपन्न कराया।

आज निकलेगी भव्य रथयात्रा

गुरुवार सुबह मंदिर के कपाट तड़के खोले गए और सुबह से ही दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर तक श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को विधिवत रथ पर विराजमान किया जाएगा। पारंपरिक श्रृंगार के पश्चात शाम को भव्य रथयात्रा आरंभ होगी। हजारों श्रद्धालु जयघोष और भक्ति गीतों के बीच रथ को खींचते हुए भगवान को मौसीबाड़ी तक पहुंचाएंगे। यह यात्रा रांची की सबसे प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है और इसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

महिला श्रद्धालुओं को मिलेगा विशेष अवसर

रथयात्रा के दौरान निर्धारित समय तक महिला श्रद्धालुओं को रथ पर चढ़कर भगवान की पूजा-अर्चना करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भगवान के विग्रहों को मौसीबाड़ी में स्थापित किया जाएगा, जहां शाम के समय आम श्रद्धालु भी दर्शन और पूजा कर सकेंगे। रात में भगवान की शयन आरती के साथ दिनभर के धार्मिक कार्यक्रमों का समापन होगा।

आज एक साथ लगेगा बाल भोग और अन्न भोग

रथयात्रा का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान को बाल भोग और अन्न भोग एक साथ अर्पित किया जाता है। पारंपरिक व्यंजनों में चावल से बने अन्न भोग के साथ मीठे पुलाव का प्रसाद भी चढ़ाया जाएगा। वहीं रात्रि में मालपुआ, बुंदिया और छिलका रोटी का विशेष भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। इस परंपरा का श्रद्धालुओं के बीच विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

रथयात्रा मेले में उमड़ रही लोगों की भीड़

नेत्रोत्सव के साथ ही रथयात्रा मेले की शुरुआत हो चुकी है। मुख्य मंदिर से लेकर मौसीबाड़ी तक पूरे मार्ग पर अस्थायी दुकानों की लंबी श्रृंखला सज गई है। यहां धार्मिक सामग्री, खिलौने, हस्तशिल्प, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और विभिन्न प्रकार के खान-पान के स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोग मेले का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की हैं।

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