
बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट यानी CSAM को लेकर केंद्र सरकार ने Meta को कड़ी चेतावनी दी है। सरकार ने साफ कहा है कि अगर प्लेटफॉर्म पर कानून का उल्लंघन होता है और उससे जुड़े लोगों या संस्थाओं की भूमिका सामने आती है, तो उन्हें ‘सेफ हार्बर’ का कानूनी संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, Meta के अधिकारियों के साथ बातचीत में कंटेंट मॉडरेशन को लेकर भी कई अहम बातें रखी गई हैं। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म को केवल ग्लोबल नियमों के आधार पर काम करने के बजाय भारत की भाषाओं, संस्कृति और सामाजिक माहौल को भी ध्यान में रखना चाहिए।
सरकार ने कहा- मकसद सेंसरशिप नहीं, यूजर की सुरक्षा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर कंटेंट को बेवजह सेंसर करना नहीं है। फोकस गैर-कानूनी कंटेंट पर रोक लगाने और यूजर्स, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। सरकार का मानना है कि अलग-अलग देशों में सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्थानीय नियमों और संवेदनशीलताओं का भी ध्यान रखना चाहिए।
CSAM को लेकर केंद्र की सख्ती पहले भी सामने आ चुकी है। अक्टूबर 2023 में सरकार ने X, YouTube और Telegram को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। उस समय चेतावनी दी गई थी कि नियमों का पालन नहीं करने पर IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
हाल में सरकार ने Instagram पर ऐसे विज्ञापनों को लेकर भी Meta को नोटिस भेजा था, जिनसे कथित तौर पर CSAM तक पहुंच आसान होने की बात सामने आई थी। अब सरकार Meta के जवाब की समीक्षा कर रही है।
वहीं, AI से बनाए गए सिंथेटिक कंटेंट को लेकर भी केंद्र ने साफ संकेत दिए हैं कि ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट लेबल होना चाहिए। इससे यूजर्स को पता रहेगा कि वह सामग्री वास्तविक है या AI से तैयार की गई है। सरकार ने कहा है कि गैर-कानूनी कंटेंट, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और यूजर सुरक्षा से जुड़े मामलों पर निगरानी आगे भी जारी रहेगी।

