PostNxt - Breaking News
Advertisement
Premium Placement

Grow Your Brand with PostNxt Media

Advertise Here

जमशेदपुर में पुलिस कस्टडी में अजित महतो की मौत की जांच के लिए अर्जुन मुंडा ने मानवधिकार आयोग को पत्र लिखा

postnext

postnext

Jan 05, 2026 · 11:53 PM
Share:
जमशेदपुर में पुलिस कस्टडी में अजित महतो की मौत की जांच के लिए अर्जुन मुंडा ने मानवधिकार आयोग को पत्र लिखा
Promoted Story

Reach 5 Million Readers Monthly Across Our Networks

Place your business advertisement on India's fastest-growing news portal.

Get Media Kit

न्यूज डेस्क : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने जमशेदपुर में पुलिस कस्टडी में अजित महतो की मौत की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा वो। पत्र कुछ इस प्रकार है: –

सेवा में,
माननीय अध्यक्ष महोदय,
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
नई दिल्ली
विषयः झारखंड राज्य के जमशेदपुर (मानगो) क्षेत्र में श्री अजीत महतो की पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु के संबंध में मानवाधिकार उल्लंघन की स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच हेतु।

महोदय,
मैं आपका ध्यान झारखंड राज्य के जमशेदपुर अंतर्गत मानगो, गोकुल नगर बस्ती निवासी श्री अजीत महतो की दिनांक 30 दिसंबर 2025 को पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। यह घटना प्रथम दृष्टया संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं गरिमा के अधिकार तथा स्थापित मानवाधिकार मानकों के गंभीर उल्लंघन का विषय प्रतीत होती है।
यह अत्यंत चिंताजनक है कि बिना किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के, मात्र एक अप्राकृतिक मृत्यु (यू.डी.) प्रकरण दर्ज कर मृतक के परिजनों को सादे कागज पर जबरन हस्ताक्षर करवाकर ₹200000 की राशि थमा दी गई। जिसके वैधानिक आधार एवं प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। इससे प्रकरण की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
यह भी तथ्य है कि गिरफ्तारी के पश्चात लगभग दो दिनों तक परिजनों को मृतक से मिलने की अनुमति नहीं दी गई एवं जिससे यह प्रतीत होता है कि पुलिस यातना से ही इनकी मृत्यु हुई है। इसी अवधि में मृतक की गर्भवती पत्नी ने एक नवजात कन्या को जन्म दिया। श्री अजीत महतो अपने परिवार के एकमात्र आजीविका अर्जक थे। परिणामस्वरूप एक परिवार गंभीर सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक संकट में आ गया है।
पुलिस अभिरक्षा में किसी नागरिक की मृत्यु स्वयं में एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है, जिसकी जांच स्वतंत्र, उच्चस्तरीय एवं न्यायिक प्रकृति की होनी अनिवार्य है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि-

इस प्रकरण का स्वतः संज्ञान (Suo Moto Cognizance) लेते हुए स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच सुनिश्चित की जाए।
दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों/अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।

मृतक के परिजनों को न्यायोचित एवं सम्मानजनक मुआवजा, पुनर्वास एवं आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए।
मुझे विश्वास है कि माननीय आयोग इस गंभीर एवं संवेदनशील मानवाधिकार प्रकरण में शीघ्र हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करेगा।

Found this article helpful? Share it:

Share: