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BJP विधायक मंजू कुमारी के साथ IAS के व्यवहार पर बाबूलाल का बयान

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Apr 10, 2026 · 11:27 PM
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BJP विधायक मंजू कुमारी के साथ IAS के व्यवहार पर बाबूलाल का बयान
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रांची : भाजपा का यह आरोप है कि सरकार के अधिकारी माननीय के साथ उचित व्यवहार नहीं करते हैं। इसका एक दिया गया है।

जमुआ विधायक के साथ राज्य के पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव द्वारा कार्यालय में किए गए अमर्यादित ,अहंकारी व्यवहार पर बोले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी

*झारखंड में कतिपय मनबढू अधिकारियों का रवैया तानाशाह जैसा : बाबूलाल मरांडी*

 

*अधिकारी जनप्रतिनिधियों को भी समझ रहे ‘दरबारी’*

 

*मुख्यमंत्री लें संज्ञान, ऐसे अधिकारियों को बताएं औकात*

 

जमुआ की भाजपा विधायक मंजू कुमारी द्वारा अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार से मुलाकात के दौरान उक्त अधिकारी के अहंकार पूर्ण रवैए पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने झारखंड में कुछ मनबढू अधिकारियों का रवैया तानाशाह जैसा बताया है।

बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा है कि जो तस्वीर सामने आई है, वह सिर्फ एक तस्वीर नहीं… यह सत्ता पोषित घमंड और व्यवस्था की सड़ांध का जीता-जागता प्रमाण है। एक तरफ जनता द्वारा चुनी गई माननीय विधायक, और दूसरी तरफ एक विवादों में घिरे रहे अधिकारी… लेकिन व्यवहार ऐसा, मानो जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि कोई फरियादी सामने बैठा हो! क्या यही लोकतंत्र है? क्या यही सम्मान है जनता के वोट का?

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री तक आम नागरिक को अपने पास बैठाकर सम्मान देते हैं, तो ये राज्य के अधिकारी किस घमंड में चूर हैं? जो अधिकारी विधायक की गरिमा नहीं समझता, वो आम जनता को क्या समझेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पथ निर्माण विभाग पहले ही भ्रष्टाचार के दागों से सना हुआ है… और अब उसके अधिकारी जनप्रतिनिधियों को भी ‘दरबारी’ समझने लगे हैं! अहंकार इतना कि शिष्टाचार भी भूल गए? ये तो और भी शर्मनाक है कि एक महिला विधायक के साथ भी ऐसा अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का अपमान है।

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से संज्ञान लेते हुए ऐसे ‘कमाऊ, बेलगाम और मनबढू’ अधिकारियों को उनकी औकात याद दिलाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री उन्हें समझाइए कि वे जनता के सेवक हैं, शासक नहीं! अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि झारखंड में ऐसे विवादास्पद तमाम अधिकारी ही असली सत्ता हैं और मुख्यमंत्री सहित दूसरे जनप्रतिनिधि सिर्फ नाम के हैं। व्यवस्था की गरिमा बचाने के लिये अनुशासन बनाये रखना बेहद ज़रूरी है।  याद रखें अहंकार और भ्रष्टाचार का अंत हमेशा एक ही होता है…जेल, बेल और उम्रभर की बदनामी। फैसला हेमंत सोरेन जी को करना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों का सम्मान बचाना है या ऐसे ही घमंडी अधिकारियों को खुली छूट देनी है? एक दिन जब सीएम भी कभी सत्ता से बाहर होगें न तो ऐसे ही अधिकारी उन्हें भी औकात बताने में तनिक भी परहेज नहीं करेंगे। यह बात उन्हें याद रखनी चाहिए।

#BabulalMarandi #Manjukumarimla

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